मेरठ तेजी से बदलते शहरी ढांचे और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर से गुजर रहा है. एक ओर शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल बेगमपुल पर भूमिगत व्यावसायिक बाजार विकसित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के आसपास जमीन और मकानों की खरीद महंगी होने के संकेत मिल रहे हैं.
नमो भारत परियोजना के तहत बेगमपुल स्टेशन के भूमिगत हिस्से को एक आधुनिक कमर्शियल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके साथ ही जिला प्रशासन मेरठ मास्टर प्लान-2050 के अनुरूप प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के आसपास सर्किल रेट और स्टांप शुल्क में संशोधन की तैयारी कर रहा है. यदि प्रस्ताव लागू होता है तो कई क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री पर अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है.
बेगमपुल स्टेशन के नीचे बनेगा आधुनिक बाजार
एनसीआरटीसी (NCRTC) बेगमपुल नमो भारत स्टेशन के अंडरग्राउंड क्षेत्र को एक नए शॉपिंग और सर्विस जोन में बदलने की योजना पर काम कर रही है. करीब 3,178 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस बाजार में 30 से अधिक दुकानें और व्यावसायिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी.
यहां फूड कोर्ट, कैफे, कन्वीनियंस स्टोर, रिटेल आउटलेट और अन्य ग्राहक सेवाएं उपलब्ध होंगी. स्टेशन का स्थान शहर के प्रमुख बाजारों आबूलेन, लालकुर्ती और बेगमपुल क्षेत्र के बीच होने के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों को एक ही जगह कई सुविधाएं मिल सकेंगी.
एनसीआरटीसी इस व्यावसायिक क्षेत्र के संचालन के लिए लंबी अवधि का लाइसेंस देने की तैयारी में है, जिससे निजी निवेशकों और ब्रांडेड रिटेल कंपनियों की भी रुचि बढ़ सकती है.
एक्सप्रेसवे और RRTS के आसपास क्यों बढ़ सकती हैं सर्किल रेट?
मेरठ प्रशासन का मानना है कि नई परिवहन परियोजनाओं ने कई इलाकों की जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य बढ़ा दिया है. ऐसे में मौजूदा सर्किल रेट और बाजार कीमतों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.
इसी अंतर को कम करने के लिए प्रशासन कुछ क्षेत्रों में स्टांप शुल्क और सर्किल रेट में 20 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि पर विचार कर रहा है. प्रस्तावित बदलाव विशेष रूप से उन इलाकों को प्रभावित कर सकते हैं जो गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत स्टेशनों के नजदीक स्थित हैं.
किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर?
प्रारंभिक चर्चाओं के अनुसार परतापुर, शताब्दी नगर, मोदीपुरम, सरधना बेल्ट और एक्सप्रेसवे से जुड़े गांवों में सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है. इन इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में जमीन और आवासीय संपत्तियों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. बेहतर कनेक्टिविटी और दिल्ली-एनसीआर तक आसान पहुंच के कारण निवेशकों की रुचि भी लगातार बढ़ रही है.
RRTS और एक्सप्रेसवे ने कैसे बदली प्रॉपर्टी की तस्वीर?
नमो भारत कॉरिडोर ने दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा समय को काफी कम कर दिया है. इससे स्टेशन के आसपास स्थित क्षेत्रों की मांग में तेजी आई है. वहीं दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने शहर के बाहरी हिस्सों को भी विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया है. कई स्थानों पर जमीन की कीमतें पहले की तुलना में 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ने की चर्चा है.
प्रशासन की नई योजना क्या है?
मेरठ मास्टर प्लान-2050 के तहत प्रशासन क्षेत्रवार पुनर्वर्गीकरण पर काम कर रहा है. नई व्यवस्था में एक्सप्रेसवे और प्रमुख परिवहन कॉरिडोर के आसपास स्थित इलाकों को अलग श्रेणी में रखा जा सकता है. इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों का मूल्यांकन उनकी वर्तमान कनेक्टिविटी और विकास संभावनाओं के आधार पर करना है. यदि प्रस्ताव लागू होता है तो राजमार्गों और RRTS स्टेशनों के नजदीक संपत्ति खरीदने वालों को अधिक स्टांप शुल्क देना पड़ सकता है.
खरीदारों और निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि नई दरें लागू होने से पहले कई खरीदार रजिस्ट्री कराने की कोशिश कर सकते हैं. दूसरी तरफ लंबी अवधि के निवेशक अब भी इन क्षेत्रों को बेहतर रिटर्न वाले विकल्प के रूप में देख रहे हैं. जो लोग स्वयं रहने के लिए मकान खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह जरूरी होगा कि वे संबंधित कॉलोनी की वैधता, विकास प्राधिकरण की मंजूरी और भविष्य की दरों का आकलन करके ही फैसला लें.
मेरठ का रियल एस्टेट किस दिशा में बढ़ रहा है?
बेगमपुल का अंडरग्राउंड मार्केट, नमो भारत कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे परियोजनाएं संकेत देती हैं कि मेरठ तेजी से एक आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ते निवेश के साथ संपत्ति की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास मेरठ के रियल एस्टेट बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.