हिंदू पंचांग में हर महीने पूर्णिमा तिथि आती है, लेकिन अश्विन मास की पूर्णिमा को विशेष महत्व प्राप्त है. इसे शरद पूर्णिमा या कोजागिरी पूर्णिमा कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृतमयी किरणों की वर्षा करता है, इसलिए इसे साल की सबसे शुभ और पवित्र पूर्णिमा माना जाता है.
शरद पूर्णिमा को लेकर केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण भी चर्चा में रहते हैं. चांदनी में खीर रखने की परंपरा से लेकर पूरी रात जागरण करने की मान्यता तक, इस पर्व से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिनके पीछे आस्था और विज्ञान दोनों का अनोखा संगम देखने को मिलता है.