1980–90 के दशक में छोटे वर्कशॉप्स में तकनीशियनों ने विदेशी मशीनों को खोलकर समझा और उन्हें भारतीय बिजली व्यवस्था के अनुसार री-इंजीनियर करना शुरू किया. यहीं से लोकल इलेक्ट्रिकल क्लस्टर विकसित हुआ.
मेरठ में लंबे समय तक बिजली कटौती और वोल्टेज की समस्या रही. इसी जरूरत ने स्थानीय कारीगरों को स्टेबलाइजर, इन्वर्टर और इलेक्ट्रिकल उपकरणों का लोकल इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रेरित किया.
यहां से मिट्टी के बर्तन, मनके, चूड़ियां, टेराकोटा वस्तुएं, तांबे के उपकरण और हड़प्पाई निर्माण अवशेष मिले थे.
दोनों स्थल मेरठ क्षेत्र में स्थित हैं और इतिहासकार इन्हें हड़प्पा से वैदिक काल के संक्रमण की महत्वपूर्ण कड़ी मानते हैं.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 1958-59 में यहां खुदाई की थी.
यह सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे पूर्वी चौकी मानी जाती है, जहां हड़प्पाई संस्कृति के अवशेष मिले थे.
आलमगीरपुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिंडन नदी के किनारे स्थित एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है.
सरकार के अनुसार 2026–27 तक मेरठ की अर्थव्यवस्था को लगभग $30 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.